विनोद धीमान। अयोध्या से एक भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है। GST विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने शंकराचार्य विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि शंकराचार्य द्वारा मुख्यमंत्री योगी को लेकर की गई टिप्पणी से वह बेहद आहत थे, जिसके बाद उन्होंने यह कठोर लेकिन भावनात्मक निर्णय लिया।
सूत्रों के मुताबिक, इस्तीफा देने के तुरंत बाद प्रशांत कुमार सिंह ने अपनी पत्नी को फोन किया। फोन पर उनकी आवाज भर्रा गई और वह फूट-फूटकर रो पड़े। उन्होंने पत्नी से कहा, “मैंने इस्तीफा दे दिया है। क्योंकि जिसका नमक खाते हैं, उसका आदर करना चाहिए।” यह वाक्य उनके निर्णय की भावना और निष्ठा को दर्शाता है।
प्रशांत कुमार सिंह ने अपने इस्तीफे के पीछे साफ वजह बताते हुए कहा कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और कार्यशैली का सम्मान करते हैं। शंकराचार्य द्वारा की गई टिप्पणी उन्हें व्यक्तिगत तौर पर अपमानजनक और पीड़ादायक लगी, जिसे वह स्वीकार नहीं कर सके। उनके अनुसार, एक सरकारी अधिकारी होने के नाते नैतिक मूल्यों और आत्मसम्मान से समझौता करना उनके लिए संभव नहीं था।
इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में तीखी चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोग उनके फैसले को साहसिक और सिद्धांतों पर आधारित बता रहे हैं, तो कुछ इसे भावनाओं में लिया गया कदम मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है, जहां लोग प्रशांत कुमार सिंह की निष्ठा और भावुकता पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
वहीं, GST विभाग की ओर से अभी तक आधिकारिक बयान नहीं आया है कि उनका इस्तीफा स्वीकार किया गया है या नहीं। लेकिन इतना तय है कि प्रशांत कुमार सिंह का यह कदम केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि व्यक्तिगत आस्था, सम्मान और वफादारी से जुड़ा हुआ मामला बन चुका है।
अयोध्या की इस खबर ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या आज के प्रशासनिक तंत्र में व्यक्तिगत मूल्यों और भावनाओं के लिए जगह बची है—और अगर है, तो उसकी कीमत कितनी बड़ी हो सकती है।



