रजनी सोनी। पंजाब में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस एक नए सियासी संकट में फंसती नजर आ रही है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्टल के एक इंटरव्यू ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उनके बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है, जबकि पार्टी फिलहाल डैमेज कंट्रोल मोड में दिखाई दे रही है।
राजिंदर कौर भट्टल 1996-97 के दौरान पंजाब की मुख्यमंत्री रहीं। हाल ही में एक यूट्यूबर को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री रहते हुए कुछ अफसरों ने उन्हें दोबारा चुनाव जीतने के लिए बेहद चौंकाने वाला सुझाव दिया था। भट्टल के अनुसार, अफसरों ने बाजारों और ट्रेनों में धमाके कर दहशत फैलाने की बात कही थी, ताकि डर के माहौल में वोटरों को प्रभावित किया जा सके।
हालांकि, भट्टल ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने अफसरों को फटकार लगाते हुए कहा था कि वह “लाशों की राजनीति” नहीं करेंगी। भट्टल ने इंटरव्यू में बताया कि इसके बाद उन्होंने छोटी से छोटी घटना पर भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे, ताकि किसी भी तरह की हिंसा या अराजकता को रोका जा सके।
इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। बीजेपी और आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल उठाए हैं कि अगर उस दौर में ऐसे सुझाव दिए जा रहे थे, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी थी। विपक्ष का आरोप है कि कांग्रेस ने हमेशा सत्ता के लिए किसी भी हद तक जाने की राजनीति की है।
वहीं कांग्रेस इस पूरे मामले में बैकफुट पर नजर आ रही है। पार्टी के भीतर बयान को लेकर असहजता साफ दिखाई दे रही है। हालात संभालने के लिए पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग सक्रिय हो गए हैं। दोनों नेता पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से लगातार संवाद कर रहे हैं और विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की रणनीति बना रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के चुनाव से पहले यह विवाद कांग्रेस के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है, खासकर तब जब पार्टी पहले ही पंजाब में अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कांग्रेस इस बयान से उपजे संकट से कैसे उबरती है और जनता के बीच अपनी छवि को कैसे संभाल पाती है।



