विनोद धीमान। आगरा से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ एक परिवार को झकझोर कर रख दिया बल्कि पुलिस और साइबर एजेंसियों को भी हैरानी में डाल दिया। माता-पिता अपने बच्चों के लिए क्या कुछ नहीं करते, लेकिन जब वही बच्चा दुनिया छोड़ जाए तो उस दर्द का अंदाजा लगाना मुश्किल है। आगरा में रहने वाले एक इंजीनियर पिता के साथ कुछ ऐसा ही हुआ, जब उनके 21 वर्षीय बेटे ने आत्महत्या कर ली।
यह घटना पिछले साल की है। बेटे की मौत के बाद परिवार गहरे सदमे में चला गया। हालांकि पिता को एक बात लगातार परेशान कर रही थी—आखिर उनका बेटा ऐसा कदम क्यों उठाएगा? इसी दौरान उन्हें पता चला कि आत्महत्या से पहले बेटे ने अपने मोबाइल फोन का सारा डेटा डिलीट कर दिया था। यही बात उनके शक की वजह बनी। पिता को लगा कि बेटे की मौत के पीछे कोई बड़ा कारण छुपा है।
इंजीनियर होने के नाते पिता को तकनीकी समझ थी। उन्होंने बेटे का मोबाइल अपने पास लिया और खास सॉफ्टवेयर की मदद से डिलीट किया गया डेटा रिकवर करने का फैसला किया। जैसे-जैसे फोन का डेटा वापस आता गया, वैसे-वैसे सच्चाई की परतें खुलती चली गईं। जो सामने आया, उसने पिता ही नहीं, बल्कि पुलिस को भी चौंका दिया।
रिकवर किए गए डेटा में कई चैट्स, कॉल रिकॉर्ड्स और डिजिटल सबूत मिले, जिनसे पता चला कि युवक लंबे समय से साइबर ब्लैकमेलिंग का शिकार था। उसे सोशल मीडिया के जरिए फंसाया गया और फिर आपत्तिजनक कंटेंट के नाम पर लगातार पैसों की मांग की जा रही थी। मानसिक दबाव और डर के चलते युवक टूट चुका था और इसी तनाव में उसने आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठा लिया।
जांच में यह भी सामने आया कि यह पूरा मामला महाराष्ट्र में फैले एक बड़े साइबर ब्लैकमेल रैकेट से जुड़ा हुआ है, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में युवाओं को अपना शिकार बना रहा था। पिता द्वारा जुटाए गए सबूतों के आधार पर मामला हाथरस पुलिस तक पहुंचा। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने इस रैकेट से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है। यह मामला एक चेतावनी भी है कि साइबर अपराध किस तरह चुपचाप जिंदगियां बर्बाद कर रहे हैं। साथ ही, यह एक पिता की हिम्मत और जज्बे की कहानी भी है, जिसने अपने बेटे को न्याय दिलाने के लिए हर हद पार कर दी।



